आदि पर्व  अध्याय २

सूत उवाच

पर्व सानत्सुजातं च गुह्यमध्यात्मदर्शनम् |  ५१   क
यानसन्धिस्ततः पर्व भगवद्यानमेव च ||  ५१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति