आदि पर्व  अध्याय २

सूत उवाच

पार्थस्य वनवासश्च उलूप्या पथि सङ्गमः |  ९१   क
पुण्यतीर्थानुसंय़ानं वभ्रुवाहनजन्म च ||  ९१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति