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सौप्तिक पर्व
अध्याय २
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कृप उवाच
हीनं पुरुषकारेण यदा दैवेन वा पुनः |  १९   क
कारणाभ्यामथैताभ्यामुत्थानमफलं भवेत् |  १९   ख
हीनं पुरुषकारेण कर्म त्विह न सिध्यति ||  १९   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति