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सौप्तिक पर्व
अध्याय २
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कृप उवाच
उत्थाय़ोत्थाय़ हि सदा प्रष्टव्या वृद्धसंमताः |  २२   क
तेऽस्य योगे परं मूलं तन्मूला सिद्धिरुच्यते ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति