कर्ण पर्व  अध्याय ४९

कृष्ण उवाच

कौशिकोऽप्यभवद्विप्रस्तपस्वी न वहुश्रुतः |  ४१   क
नदीनां सङ्गमे ग्रामाददूरे स किलावसत् ||  ४१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति