कर्ण पर्व  अध्याय २४

दुर्योधन उवाच

स दानवैः क्षततनुर्जामदग्न्यो द्विजोत्तमः |  १५१   क
संस्पृष्टः स्थाणुना सद्यो निर्व्रणः समजाय़त ||  १५१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति