अनुशासन पर्व  अध्याय २

भीष्म उवाच

गृहस्थश्चावजेष्यामि मृत्युमित्येव स प्रभो |  ४०   क
प्रतिज्ञामकरोद्धीमान्दीप्ततेजा विशां पते ||  ४०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति