अनुशासन पर्व  अध्याय २

भीष्म उवाच

यदि प्रमाणं धर्मस्ते गृहस्थाश्रमसंमतः |  ५३   क
प्रदानेनात्मनो राज्ञि कर्तुमर्हसि मे प्रिय़म् ||  ५३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति