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शल्य पर्व
अध्याय २३
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सञ्जय़ उवाच
स यात्वा वाहिनीं तूर्णमव्रवीत्त्वरय़न्युधि |  २   क
युध्यध्वमिति संहृष्टाः पुनः पुनररिन्दमः |  २   ख
अपृच्छत्क्षत्रिय़ांस्तत्र क्व नु राजा महारथः ||  २   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति