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अनुशासन पर्व
अध्याय २
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भीष्म उवाच
स्वरेण विप्रः शैक्षेण त्रीँल्लोकाननुनादय़न् |  ७७   क
उवाच चैनं धर्मज्ञं पूर्वमामन्त्र्य नामतः ||  ७७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति