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अनुशासन पर्व
अध्याय २
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भीष्म उवाच
अनेन चैव देहेन लोकांस्त्वमभिपत्स्यसे |  ८५   क
निर्जितश्च त्वय़ा मृत्युरैश्वर्यं च तवोत्तमम् ||  ८५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति