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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २
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वैशम्पाय़न उवाच
यदि मामनुजानीय़ाद्भवान्गन्तुं तपोवनम् |  १२   क
न हि शान्तिं प्रपश्यामि घातय़ित्वा पितामहम् |  १२   ख
कर्णं च पुरुषव्याघ्रं सङ्ग्रामेष्वपलाय़िनम् ||  १२   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति