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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २
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वैशम्पाय़न उवाच
एवं सम्पूजितो राजा पाण्डवैरम्विकासुतः |  १   क
विजहार यथापूर्वमृषिभिः पर्युपासितः ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति