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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २
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वैशम्पाय़न उवाच
आनृशंस्यपरो राजा प्रीय़माणो युधिष्ठिरः |  ३   क
उवाच स तदा भ्रातॄनमात्यांश्च महीपतिः ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति