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विराट पर्व
अध्याय ५२
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः पार्थश्च सङ्क्रुद्धश्चित्रान्मार्गान्प्रदर्शय़न् |  ५   क
दिशः सञ्छादय़न्वाणैः प्रदिशश्च महारथः ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति