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मौसल पर्व
अध्याय २
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वैशम्पाय़न उवाच
अद्य प्रभृति सर्वेषु वृष्ण्यन्धकगृहेष्विह |  १८   क
सुरासवो न कर्तव्यः सर्वैर्नगरवासिभिः ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति