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वन पर्व
अध्याय ४६
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धृतराष्ट्र उवाच
ये चास्य सचिवा मन्दाः कर्णसौवलकादय़ः |  ३५   क
तेऽप्यस्य भूय़सो दोषान्वर्धय़न्ति विचेतसः ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति