स्वर्गारोहण पर्व  अध्याय २

वैशम्पाय़न उवाच

अय़ोमुखैश्च काकोलैर्गृध्रैश्च समभिद्रुतम् |  २०   क
सूचीमुखैस्तथा प्रेतैर्विन्ध्यशैलोपमैर्वृतम् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति