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स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय २
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वैशम्पाय़न उवाच
कूटशाल्मलिकं चापि दुस्पर्शं तीक्ष्णकण्टकम् |  २५   क
ददर्श चापि कौन्तेय़ो यातनाः पापकर्मिणाम् ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति