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स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय २
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वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्तु निर्विण्णस्तेन गन्धेन मूर्छितः |  ३०   क
निवर्तने धृतमनाः पर्यावर्तत भारत ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति