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स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय २
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वैशम्पाय़न उवाच
निवेदय़ामास च तद्धर्मराजचिकीर्षितम् |  ५४   क
यथोक्तं धर्मपुत्रेण सर्वमेव जनाधिप ||  ५४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति