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भीष्म पर्व
अध्याय २
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वैशम्पाय़न उवाच
गृहीतशस्त्राभरणा वर्मिणो वाजिपृष्ठगाः |  २९   क
अरुणोदय़ेषु दृश्यन्ते शतशः शलभव्रजाः ||  २९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति