वन पर्व  अध्याय २

युधिष्ठिर उवाच

आहरेय़ुर्हि मे येऽपि फलमूलमृगांस्तथा |  ८   क
त इमे शोकजैर्दुःखैर्भ्रातरो मे विमोहिताः ||  ८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति