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विराट पर्व
अध्याय २
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अर्जुन उवाच
गीतं नृत्तं विचित्रं च वादित्रं विविधं तथा |  २४   क
शिक्षय़िष्याम्यहं राजन्विराटभवने स्त्रिय़ः ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति