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विराट पर्व
अध्याय २
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अर्जुन उवाच
प्रजानां समुदाचारं वहु कर्मकृतं वदन् |  २५   क
छादय़िष्यामि कौन्तेय़ माय़यात्मानमात्मना ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति