सभा पर्व  अध्याय ७१

विदुर उवाच

एवमेते महोत्पाता वनं गच्छति पाण्डवे |  २८   क
भारतानामभावाय़ राजन्दुर्मन्त्रिते तव ||  २८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति