menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय २
chevron_left
chevron_right
कर्ण उवाच
निपातिते शान्तनवे महारथे; दिवाकरे भूतलमास्थिते यथा |  १२   क
न पार्थिवाः सोढुमलं धनञ्जय़ं; गिरिप्रवोढारमिवानिलं द्रुमाः ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति