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द्रोण पर्व
अध्याय २
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कर्ण उवाच
कुरून्रक्षन्पाण्डुपुत्राञ्जिघांसं; स्त्यक्त्वा प्राणान्घोररूपे रणेऽस्मिन् |  २२   क
सर्वान्सङ्ख्ये शत्रुसङ्घान्निहत्य; दास्याम्यहं धार्तराष्ट्राय़ राज्यम् ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति