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द्रोण पर्व
अध्याय २
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कर्ण उवाच
रथं चाग्र्यं हेमजालावनद्धं; रत्नैश्चित्रं चन्द्रसूर्यप्रकाशैः |  २७   क
द्रव्यैर्युक्तं सम्प्रहारोपपन्नै; र्वाहैर्युक्तं तूर्णमावर्तय़स्व ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति