वन पर्व  अध्याय २६१

युधिष्ठिर उवाच

कथं दाशरथी वीरौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ |  २   क
प्रस्थापितौ वनं व्रह्म मैथिली च यशस्विनी ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति