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विराट पर्व
अध्याय ३५
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वैशम्पाय़न उवाच
गावो राष्ट्रस्य कुरुभिः काल्यन्ते नो वृहन्नडे |  ३   क
तान्विजेतुं मम भ्राता प्रय़ास्यति धनुर्धरः ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति