सभा पर्व  अध्याय ३

वैशम्पाय़न उवाच

उत्तमद्रव्यसम्पन्ना मणिप्राकारमालिनी |  २३   क
वहुरत्ना वहुधना सुकृता विश्वकर्मणा ||  २३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति