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कर्ण पर्व
अध्याय २
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सञ्जय़ उवाच
जय़ो वापि वधो वापि युध्यमानस्य संय़ुगे |  ९   क
भवेत्किमत्र चित्रं वै युध्यध्वं सर्वतोमुखाः ||  ९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति