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शल्य पर्व
अध्याय २
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वैशम्पाय़न उवाच
सुदक्षिणो हतो यत्र जलसन्धश्च कौरवः |  ३३   क
श्रुताय़ुश्चाच्युताय़ुश्च किमन्यद्भागधेय़तः ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति