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शल्य पर्व
अध्याय २
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वैशम्पाय़न उवाच
अलम्वुसस्तथा राजन्राक्षसश्चाप्यलाय़ुधः |  ३५   क
आर्श्यशृङ्गश्च निहतः किमन्यद्भागधेय़तः ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति