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शल्य पर्व
अध्याय २
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वैशम्पाय़न उवाच
राजानो राजपुत्राश्च शूराः परिघवाहवः |  ३८   क
निहता वहवो यत्र किमन्यद्भागधेय़तः ||  ३८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति