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शल्य पर्व
अध्याय २
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वैशम्पाय़न उवाच
नानादेशसमावृत्ताः क्षत्रिय़ा यत्र सञ्जय़ |  ३९   क
निहताः समरे सर्वे किमन्यद्भागधेय़तः ||  ३९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति