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शल्य पर्व
अध्याय २
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वैशम्पाय़न उवाच
पुत्राश्च मे विनिहताः पौत्राश्चैव महावलाः |  ४०   क
वय़स्या भ्रातरश्चैव किमन्यद्भागधेय़तः ||  ४०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति