menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शल्य पर्व
अध्याय २
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
रणमूर्ध्नि हतो भीष्मः पश्यतां वः किरीटिना |  ५३   क
एवमेव हतो द्रोणः सर्वेषामेव पश्यताम् ||  ५३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति