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शल्य पर्व
अध्याय २
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वैशम्पाय़न उवाच
एह्येहि पुत्र राजेन्द्र ममानाथस्य साम्प्रतम् |  ९   क
त्वय़ा हीनो महावाहो कां नु यास्याम्यहं गतिम् ||  ९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति