स्त्री पर्व  अध्याय २०

गान्धार्यु उवाच

तमेषा हि समासाद्य भार्या भर्तारमन्तिके |  ५   क
विराटदुहिता कृष्ण पाणिना परिमार्जति ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति