अनुशासन पर्व  अध्याय २०

भीष्म उवाच

अथ निष्क्रम्य भगवान्प्रय़यावुत्तरामुखः |  २८   क
कैलासं मन्दरं हैमं सर्वाननुचचार ह ||  २८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति