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अनुशासन पर्व
अध्याय २०
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भीष्म उवाच
स तत्र काञ्चनं दिव्यं सर्वरत्नमय़ं गृहम् |  ३४   क
ददर्शाद्भुतसङ्काशं धनदस्य गृहाद्वरम् ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति