अनुशासन पर्व  अध्याय २०

भीष्म उवाच

यद्यदङ्गं हि सोऽपश्यत्तस्या विप्रर्षभस्तदा |  ७२   क
नारमत्तत्र तत्रास्य दृष्टी रूपपराजिता ||  ७२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति