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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २०
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वासुदेव उवाच
यतः प्रवर्तते तन्त्रं यत्र च प्रतितिष्ठति |  १४   क
प्राणोऽपानः समानश्च व्यानश्चोदान एव च ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति