आश्रमवासिक पर्व  अध्याय २०

वैशम्पाय़न उवाच

एवं स राजा कौरव्यश्चक्रे दानमहोत्सवम् |  १६   क
नटनर्तकलास्याढ्यं वह्वन्नरसदक्षिणम् ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति