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सभा पर्व
अध्याय २०
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वासुदेव उवाच
एष ह्यैन्द्रो वैजय़न्तो गुणो नित्यं समाहितः |  १७   क
येनासुरान्पराजित्य जगत्पाति शतक्रतुः ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति