अनुशासन पर्व  अध्याय १५०

भीष्म उवाच

यथा ह्युपस्थितैश्वर्याः पूजय़न्ते नरा नरान् |  ५   क
एवमेवात्मनात्मानं पूजय़न्तीह धार्मिकाः ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति