सभा पर्व  अध्याय २०

वैशम्पाय़न उवाच

स तु सेनापती राजा सस्मार भरतर्षभ |  ३०   क
कौशिकं चित्रसेनं च तस्मिन्युद्ध उपस्थिते ||  ३०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति