शान्ति पर्व  अध्याय २८७

पराशर उवाच

मरणं जन्मनि प्रोक्तं जन्म वै मरणाश्रितम् |  १९   क
अविद्वान्मोक्षधर्मेषु वद्धो भ्रमति चक्रवत् ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति